I wonder! I am Sorry! Thanks! :)

There are times when you cannot help, but just sit on your chair, look up at the ceiling …and wonder…how difficult and troublesome your life could have been…And how wonderous and beutiful it is…at this very moment. And it is these moments we tend to lose, in our daily rush for bread and butter…We tend to forget that we all are fortunate ones…we tend to forget to say ‘Thanks’ and ‘Sorry’ at the right and required times…

I was going through these thoughts…and was looking to pen down my words…when I was able to lay my hands on this poem I had written long back for a very obvious person…Hope …everyone will like it!

इस अनजानी सी दुनिया में
बेगानों की भीड़ में
जो भुला दे सारे थकान
वो मुस्कान मिल गयी!

जिसकी एक प्यार भरी नज़र
करे दिल पे ऐसा असर
की भूलूँ सारे कहर
वो नज़र मिल गयी! 

जिसके साथ पे
जिसके दम पे
जीत लूं सारी दुनिया
वो ताकत मिल गयी!

जिसका हाथ पकड़
मैं चलूँ जहाँ तक हैं रास्ते
बिना किसी डर, सिर्फ उसके वास्ते
वो हमराह मिल गयी!

थोडी सी नजाकत
थोडी सी वो नटखट
ढेर सारी शरारत
ऐसी मोहब्बत मिल गयी!

बहुत सारा रूठना
खूब सारा मनाना
इन नोक-झोंक पे फिर मुस्कान
वो वजह मिल गयी!

बरसों से जो थी एक तमन्ना
जो था एक प्यारा ख्याल
उसकी…. उस तमन्ना से भी खूबसूरत
एक मिसाल मिल गयी!

मैं, शायद, पहली बार
हूँ खुशकिस्मत
की मेरी मोहब्बत को
…तुम मिल गयी!! 

[A repost from my personal blog Whimsical Acumen]